यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का निधन, दौड़ी शोक की लहर

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उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का रविवार को निधन हो गया है

नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का रविवार को निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे, जिसके चलते उनको के लखनऊ संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में भर्ती कराया गया था. वह 89 साल के थे. जानकारी के अनुसार कल्याण सिंह का निधन सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर से हुआ है. कल्याण सिंह के निधन से यूपी समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है. कई बड़े नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया है.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल माननीय श्री कल्याण सिंह जी का  एक लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया. उन्हें 4 जुलाई  को संजय गांधी पी जी आई के Critical Care medicine के आईसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया था. लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे फेल होने के कारण आज उन्होंने अंतिम सांस ली. कल्याण सिंह को 4 जुलाई को नाजुक अवस्था में पीजीआई शिफ्ट किया गया था. क्रिटिकल केयर मेडिसिन के आईसीयू में उपचार होने के करीब चार दिन बाद कल्याण की तबीयत में काफी सुधार हुआ था. वह लोगों से बातचीत करने के साथ उनका जवाब भी दे रहे थे. 17 जुलाई को सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया था. अगले दिन फेफड़ों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन न मिलने पर 18 जुलाई को गले में नली (नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन) डाली गई. ज्यादा दिक्कत बढ़ने पर 21 जुलाई को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. दो दिन से गुर्दे की काम करने की गति धीमी होने पर डॉक्टरों ने डायलिसिस शुरू कर दी. 

पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन बताते हैं कि कल्याण के उपचार में दिल, गुर्दा, डायबिटीज, न्यूरो, यूरो, गैस्ट्रो व क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग समेत 12 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी में लगी हुई थी. एसजीपीजीआई के डॉक्टरों के अनुसार पछिले शनिवार से 89 वर्षीय पूर्व सीएम व वरिष्ठ भाजपा नेता कल्याण सिंह की तबीयत चिंताजनक बनी हुई थी. जिसके बाद वह खुद से ऑक्सीजन नहीं ले पा रहे थे. इसकी वजह से उनके फेफड़ों और खून में पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी. फेफड़े, दिल, गुर्दा, लिवर पर दबाव बढ़ गया था. उनके उपचार में दिल, गुर्दा, डायबिटीज, न्यूरो, यूरो, गैस्ट्रो व क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग समेत 12 विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम लगातार निगरानी में लगी हुई थी.