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बर्फ़ीला कब्रिस्तान: अंटार्कटिका में दफ़न इंसानों की कहानी

अंटार्कटिका महाद्वीप दुनिया का सबसे सर्द इलाक़ा है. यहां कई बार तापमान माइनस 90 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. बहुत से लोग इसे बर्फ़ीला क़ब्रिस्तान कहते हैं.

आबादी वाली दुनिया के दूसरे छोर पर स्थित ये महाद्वीप कई ऐसे लोगों की क़ब्र अपने आगोश में समेटे है, जिनके आख़िरी दीदार भी उनके परिजनों को नसीब नहीं हुए.

इंसान ने भले ही तकनीक के क्षेत्र में ज़बरदस्त तरक़्क़ी कर ली हो, मगर अंटार्कटिका में क़ुदरत की भयंकर चुनौतियों के आगे ये प्रगति बौनी साबित होती है.

अंटार्कटिका की खोज में निकले अन्वेषक हों या प्रयोग करने गए वैज्ञानिक, यहां आने वाले कई लोग हमेशा के लिए यहीं दफ़न हो गए. न उनकी लाश मिली, न हड्डियां. वो या तो बर्फ़ की मोटी परत में दब गए या फिर ऐसी सर्द दरारों में फंस गए, जहां से वो फिर नहीं निकल सके.

उन्नीसवीं सदी:चिली की हड्डियों का राज़

अंटार्कटिका के लिविंग्सटन आइलैंड पर एक इंसानी खोपड़ी और जांघ की हड्डी पिछले 175 वर्षों से समुद्र के किनारे पड़ी है. अंटार्कटिका में मिले ये सबसे पुराने इंसानी कंकाल हैं.